Way to Spirituality : प्रेम, क्षमा, दया, समर्पण, सादगी व धैर्य कुछ ऐसी औषधियां हैं जिन्हें अपनाकर आप अहंकार, क्रोध और घृणा से मुक्ति पा सकते हैं !

Way to Spirituality : प्रेम, क्षमा, दया, समर्पण, सादगी व धैर्य कुछ ऐसी औषधियां हैं जिन्हें अपनाकर आप अहंकार, क्रोध और घृणा से मुक्ति पा सकते हैं !

अध्यात्म डैस्कः अहंकार एक ऐसा कड़वा ज़हर है जिसमें जितना अधिक बढ़ता जाता है वह उसी की दलदल में स्वयं ही धसता चला जाता है। अहंकार की वजह से ही हम दूसरों के अनुभवों और ज्ञान से वंचित रह जाते हैं क्योंकि ऐसे व्यक्ति अपने आप को सर्वोपरि मानते हैं। उन्हें हमेशा दूसरों के काम में ही खोट नज़र आता है। वे हमेशा दूसरों की कमियां गिनाने में लगे रहते हैं। अपनी बात को हमेशा ऊपर रखना और दूसरों को हमेशा नीचे दिखाने की कोशिश करना उनकी आदत में शुमार हो जाता है। जिस वजह से ऐसे लोग हमेशा अकेले रह जाते हैं। उनसे कोई भी बात करना पसंद नहीं करता। ऐसे व्यक्ति कभी ऊंचाई पर पहुंच भी जाएं तो उनका अहंकार सारी चरम सीमाएं पार कर जाता है। हरेक को अपने आगे छोटा समझने का उनका रवईया उन्हें और भी छोटा बना देता है। अपने आप को सर्वोच्च समझना और दूसरों पर हावी रहने की प्रवृति भी अहंकार से ही आती है। अहंकारी व्यक्ति को सदा यही लगता है कि सारी सुख-सुविधाएं केवल उसी को ही मिले दूसरे के दुख को देखकर उसे खुशी महसूस होती है। उन्हें केवल मैं, मेरा, और मुझे की ही परवाह रहती है।

ऐसे लोग किसी के लिए अच्छा तो कर नहीं सकते लेकिन दूसरे की तरक्की से जलते ज़रूर हैं। हमेशा तरकीबें लड़ाना और भ्रम में रहना उनकी आदत बन जाती है। जिस वजह से ऐसे लोग कई तरह की मानसिक बिमारियों के शिकार हो जाते हैं। उनसे छोटा सा दुख भी बर्दाश्त नहीं होता और वो अवसाद जैसी बिमारीयों के भी शिकार हो जाते है। उनके पास अहंकार, गुस्सा, लालच, इच्छा, नकारात्मकता, घृणा, भ्रम और भी कई दूसरी बिमारीयों जैसे तमाम अवगुण इक्ट्ठे होने लगते हैं। उनसे प्रेम, त्याग, धैर्य, क्षमा, नम्रता, दया, समर्पण और सादगी जैसी ऊत्तम औषधियां कोसों दूर हो जाती हैं।

ऐसे लोगों को चाहिए कि एक बार अपने ऊपर से अहंकार की परत हटाकर तो देखें। किसी ने भी सदा के लिए इस धरती पर नहीं रहना है। मृत्यु ही सत्य और निश्चित है। अहंकारी व्यक्ति का जब पतन आता है तो उसे अपनी एक-एक करनी का हिसाब देना पड़ता है। तब कोई उसका साथ देने वाला भी नहीं होता। इसलिए अपने अंदर के सारे बुरे भावों को क्षमा, धैर्य, नम्रता, दया व करुणा जैसी औषधियों से सदा के लिए अपने दूर करें। ये ही एक रास्ता है जो आपको सही राह ले जाएगा

Leave a Reply

Close Menu
error: Content is protected !!