सिनेमा घरों से लेकर मंदिरों तक गूंजे भक्ति रस में भीगे भजन ! आपके लिए भी सुनहरी पन्नों से तराशे हैं कुछ बेशकीमती गीत, जानिए

सिनेमा घरों से लेकर मंदिरों तक गूंजे भक्ति रस में भीगे भजन ! आपके लिए भी सुनहरी पन्नों से तराशे हैं कुछ बेशकीमती गीत, जानिए

हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम इतिहास के शुरुआती पन्नों से लेकर अब तक का सफर अगर खंगाला जाए तो भक्ति गीतों की फुहारों से आपका रोम-रोम भीग जाएगा। जिनकी गूंज बड़े पर्दे से लेकर मंदिरों तक ऐसी गूंजी कि हर कोई इन गीतों से मंत्रमुग्ध होकर ईश्वरीय महिमा के रंग में रंगा गया।

कहते हैं भक्त और भगवान के बीच बड़ा ही अदभुत संबंध है, इसलिए कई बार ऐसा भी होता है जब कभी अपने ईष्ट की तीव्र याद सताए, तब उन्हें उनके प्रति अपने मन में बसी श्रद्धा और भक्ति के बारे में बताना भी पड़ता है और उन्हीं से प्रार्थना भी करनी होती है किः-

ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे करम

नेकी पर चले बदी से टले

ताकि हंसते हुए निकले दम।

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ये गीत था फिल्म दो आंखे, बारह हाथ से, जिसके गीतकार हैं भरत व्यास, और संगीतकार हैं- वसंत देसाई।

इसी कड़ी में एक और भक्ति रंग में भीगा हुआ गीत सुनिए, फिल्म हरि दर्शन से, जिसे सुनकर मन कह उठता है…जय जय नारायण नारायण हरि-हरि..इस भजन के बोल लिखे हैं गीतकार प्रदीप ने और गाया है सुर सम्राज्ञी लता मंगेश्कर नेः-

जय जय नारायण नारायण हरि हरि,
स्वामी नारायण नारायण हरि हरि।
तेरी लीला सब से न्यारी न्यारी हरि हरि,
तेरी महिमा प्रभु है प्यारी प्यारी हरि हरि॥

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भगवान को सब पता है, उनकी मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता, क्योंकि वे तो प्यार का सागर हैं जिनकी भक्ति व प्रेम की एक बूंद भी भक्त के लिए काफी है, तो फिर आइए सुनते हैं 1955 में आई फिल्म सीमा का एक भजन, जिसके गीतकार हैं शैलेन्द्र, गायक हैं- मन्ना डे, संगीतकार हैं- शंकर जयकिशन
तू प्यार का सागर है, तेरी इक बूंद के प्यासे हम

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कहते हैं जब भगवान की भक्ति नसीब हो जाए तो फिर इस दुनियां से क्या काम है? जीने के लिए बस भगवान का नाम ही काफी है। आइए सुनते हैं ऐसे ही भावों को बयान करता हुआ ये भजन। इस भजन के गीतकार हैं हसरत जयपुरी, गायक- लता मंगेशकर, संगीतकार हैं- शंकर जयकिशन और फिल्म है- एक फूल चार कांटे।

बनवाली रे, जीने का सहारा तेरा नाम रे, मुझे दुनियां वालों से क्या काम रे

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फिल्म जय संतोषी मां, फिल्म की आरती मैं तो आरती ऊतारूं रे संतोषी माता की… इस फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत रहा। जिसे आज भी सभी आरतियों से सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। जिसके गीतकार और संगीतकार प्रदीप थे और गायिका हैं उषां मंगेशकर। खास बात ये है कि इस आरती को रिकॉर्ड भी शुक्रवार के दिन ही किया गया था। तो आइए सुनते हैं ये आरती-

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भक्ति गीतों पर बात हमारी अभी खत्म नहीं हुई है ये तो श्रद्धा का एक ऐसा समुंद्र है जिसमें से भक्ति गीतों की कुछ बुंदे ही अभी आपके साथ सांझा की हैं। अभी रूह तक पहुंचने वाले भक्ति गीतों की चर्चा आपसे होनी बाकी है। अगली कड़ी में फिर कुछ गीत लेकर आपके पास आयेंगे, तब तक आप ये भजन जरूर सुनें और सबके साथ सांझा भी करें।

 

 

 

 

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