Way to Spirituality : जब आप परमानंद का साक्षात्कार कर लेंगे तब आप एक योगी की तरह हो जाएंगे !

Way to Spirituality : जब आप परमानंद का साक्षात्कार कर लेंगे तब आप एक योगी की तरह हो जाएंगे !

हर कोई खुश रहना चाहता है इसलिए खुशी की तलाश में हम छोटी-छोटी खुशियों में ही अपनी खुशियां ढूंढ लेते हैं…अच्छा भी है…क्योंकि हमारे पास पूरी दिनचर्या में बहुत कम ऐसे क्षण होते हैं जब हम मुस्कुराते हैं…आप अपने आप से ही पूछिए आपके बिजीं स्केड्यूल में ऐसे कौन से क्षण थे जब आप खुलकर और खिलखिलाकर हंसे थे….शायद ये आपको भी याद नहीं होगा….अपना टारगेट एचीव करने के चक्कर में आपने अपनी मुस्कुराहट को कहीं गिरवी रख दिया हैं…..लेकिन आप भी क्या करें काम तो करना है न ? अगर आज अपने काम को तवज्जो नहीं देंगे तो हो सकता है आप कितनों से पीछे रह जाएं और बॉस की नज़र में भी….पर फिर भी ऐसा तो कुछ है जो सोचने पर मजबूर करता है कि कुछ तो कमी है….कुछ तो खाली-खाली सा है…..मुझे और क्या चाहिए…सब कुछ होते हुए भी हमें किसकी तलाश है…..!

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Manusmriti Lakhotra Writer & Editor – https://theworldofspiritual.com

ऐसे ही कुछ प्रश्न शायद आपके भी ज़हन में उठापटक करते तो होंगे ?……तो इसका उत्तर है हमें असल में परमानंद चाहिए…..जिसे पाकर शायद आपको आपके सभी प्रश्नों के उत्तर मिल जाएं….क्षणिक की खुशी या आनंद में क्या रखा है ईश्वर ने हमें परमानंद की अनुभूति करने के लिए ही तो पैदा किया है…लेकिन हम अपनी ज़िंदगी के कीमती वर्ष सिर्फ कमाने, खाने, पीने, सोने, सुख ढूंढने और दुखी होने में ही गुजार देते हैं….अब आप पूछेंगे कि वो परमानंद क्या है ?…..इसका उत्तर श्रीमद्भागवत में लिखा है…”परमानंद की इच्छा रखना आत्मा का स्वभाव है। ईश्वर परमानंद का सागर है और हम उस ईश्वर के मामूली से हिस्से”।…. हमारी आत्मा हमेशा कुछ न कुछ अच्छा ढूंढती है, जैसे अच्छे दोस्त, अच्छा वातावरण जहां आप अच्छे से रह सकें, अच्छे लोग, अच्छी नौकरी, अच्छा वेतन, अच्छा लाइफ पार्टनर, अच्छे कर्म, अच्छी जगह घूमना-फिरना, अच्छा खाना-पीना, अच्छी बातें करना, अच्छा दान करना वगैरह- वगैरह…यानी जिसकी जितनी हैसियत है उसके मुताबिक वो अच्छा ही करना चाहता है…तो ये अच्छा करने को कौन कहता है? वो है हमारे संस्कार, हमारी इच्छाशक्ति, हमारा मन, हमारा मस्तिष्क, कुल मिलाकर हमारी अंतरआत्मा…। तो अब आप ये मान लें कि असल में हमारा मन…हमारी आत्मा हमसे सबकुछ अच्छा करने के लिए ही कहती है….आत्मा के उन्हीं अच्छे कर्मों की डिमांड में एक डिमांड ये भी शामिल है कि आप आत्मा की एक और इच्छा यानि कि परमानंद की प्राप्ति में भी सहायक हों….और ईश्वर परमानंद के सागर हैं….यकीन मानिए जिस दिन आपको ये समझ आ जाएगा कि असल में आपको ईश्वर को ही पाना है….आपके जीवन का असल लक्ष्य यही है….तो बाकी के सभी प्रश्नों के जवाब आपको खुद-ब-खुद मिल जाएंगे…और तब आप एक योगी की तरह हो जाएंगे..तब आपको सांसारिक हलचल से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसलिए रोज़ाना कुछ समय ईश्वर से साक्षात्कार करें…ओम जाप करें..ये सुनें….यक़ीन मानिए आपको अच्छा लगेगा।

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