यादगार लम्हें: वो गीत जिसने ज़िंदगी से रूबरू कराया, आज भी करोड़ों दिलों में धड़कता हैं, “इक प्यार का नग़मा है”…

यादगार लम्हें: वो गीत जिसने ज़िंदगी से रूबरू कराया, आज भी करोड़ों दिलों में धड़कता हैं, “इक प्यार का नग़मा है”…

यादगार लम्हें: कई बार कोई बेहद खूबसूरत सा नग़मा बहुत ही कम शब्दों में ज़िंदगी से रूबरू करा जाता है। हमारी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने हमें ऐसे कई यादग़ार गीत दिए हैं जिन्हें आज भी सुना जाए तो दिल से एकदम ‘आह’ सी निकलती है….कई बार तो मानों ऐसा लगता है कि जैसे उस नग़में में आप ही के बारे में बात हो रही हो…या फिर जो जज़्बात आप अब तक किसी से बयां नहीं कर पाए वो उस गीत ने कह दिए हों….अरे जनाब ! लेकिन बात तो तब बने जब वो गीत आपकी बात उन तक पहुंचा दे और सामने वाले को भी उसके अंदर की गहराई समझ आ जाए …हाहा…..और कई बार तो कोई मनपसंद नग़मा ज़ुबां पर ऐसा चढ़ जाता है कि कई-कई दिन हम उसे गुनगुनाते ही रह जाते हैं….और कितने ही दिन उस एक गीत के रंग में अपने आप को रंगा हुआ महसूस करते हैं….वैसे गीत-संगीत के मामले में हरेक की अपनी-अपनी पसंद-नापसंद और नज़रिया होता है, लेकिन एक ऐसे गीत की बात मैं आपके साथ करने जा रही हूं जो मेरे ख्याल से आपका भी पसंदीदा गीतों में से एक होगा। जिसे सुनकर सीने में एक अजीब सी कसक उठती है…. इतनी गहराई कि ज़िंदगी की हक़ीकत याद आ जाती है….इस गीत को यादग़ार बनाने में जितनी भूमिका लिरिक्स की है उतनी ही म्यूज़िक की भी है और उतनी ही इस गीत के किरदारों की….।

वो गीत है इक प्यार का नग़मा है..मोजौं की रवानी है…जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है…….ये गीत आज भी जब कहीं बजता है तो करोड़ों दिलों की धड़कन बनके गूंजता है,

इक प्यार का नग़मा है…

मोजौं की रवानी है…

ज़िंदगी और कुछ भी नहीं

तेरी-मेरी कहानी है।

कुछ पाकर खोना है

कुछ खोकर पाना है

जीवन का मतलब तो,

आना और जाना है

दो पल के जीवन से एक उम्र चुरानी है

जिन्दगी और…

ये वही गीत है जिसे जितनी बार भी सुना जाए हरबार एक नया संदेश दे जाता है और मानो कह उठता है ये जो ज़िंदगी है न, देखा जाए तो ये एक प्यार के नग़में की तरह है जिसे अगर संजीदगी, मोजौं और रवानगी के साथ जीया जाए तो बहुत कुछ है, और अगर देखा जाए तो कुछ भी नहीं है सिर्फ दो दिलों की कहानी है। यहां सुख और दुख भी है, हार और जीत भी है, फिर भी ज़िंदगी के उन्हीं पलों में से हमें एक उम्र चुरानी है और उसे जीना भी है।

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ये गाना 1972 में आई फिल्म शोर का है जिसके शब्दों में जान और अहसास फूंकने वाले गीतकार का नाम संतोष आंनद है, इस गीत को सुरों की रानी लता मंगेश्कर और गीतों में अपनी आवाज़ से दर्द भरने वाले गायक मुकेश ने गाया था, जिनके संगीत पर इस गीत के बोल थिरके वो संगीतकार हैं लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल। इस गीत में अपनी अदायगी से जिन्होंने अपने चाहने वालों का दिल जीता वो हैं उस वक्त की सूपरहिट अदाकारा नंदा और भारत के नाम से हिन्दी फिल्म जगत पर राज़ करने वाले एक्टर मनोज कुमार।

तू धार है नदिया की, मैं तेरा किनारा हूं
तू मेरा सहारा है, मैं तेरा सहारा हूं
आंखों में समंदर है, आशाओं का पानी है
ज़िन्दगी और…

तूफ़ान तो आना है, आ कर चले जाना है
बादल है ये कुछ पल का, छा कर ढल जाना है
परछाईयाँ रह जाती, रह जाती निशानी हैं
ज़िन्दगी और…

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इस गीत में बजने वाला वायलिन इस गीत की खूबसूरती और गहराई को और भी बढ़ा देता है, आइए इस गीत को एकबार सुना जाए, जिसके प्यार और ज़िंदगी के फलसफे से कुछ रवानगी को जिया जाए।

इस गीत को सुनने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

संपादकः मनुस्मृति लखोत्रा

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