Happiness is Free: अगर आप किसी PROBLEM में हैं और आपके पास SOLUTION भी है लेकिन फिर भी आप TENSION में हैं, तो आपको क्या करना चाहिए ? जानिए

Happiness is Free: अगर आप किसी PROBLEM में हैं और आपके पास SOLUTION भी है लेकिन फिर भी आप TENSION में हैं, तो आपको क्या करना चाहिए ? जानिए

कई बार एक मुश्किल जाती नहीं कि दूसरी पहले ही आ जाती है, मानों ऐसा लगता है कि जैसे हम कोई वीडियो गेम खेल रहे हैं जिसमें बाइक राइडर को उल्टे-सीधे रास्तों से और डैविल से बचते-बचाते अपने मुकाम तक पहुंचना है, लेकिन हर प्रॉब्लम से निकलना कोई आसान बात नहीं। कुछ प्रॉब्लम्स तो सीधी-सादी होती हैं लेकिन कुछ उतनी ही पेचीदा, ऐसे मौके पर हमें खुद ये समझ नहीं आता कि क्या करें ? कई बार तो हम खुद इसके जिम्मेदार होते हैं, चाहे हमारी निजी ज़िंदगी हो, प्रोफेशनल लाइफ या बिज़नेस ही क्यों न हो, क्योंकि किसी भी प्रॉब्लम का सोल्यूशन जानते हुए भी हम सही वक्त पर सही कदम नहीं उठाते। फिर क्या होता है बात बिगड़ जाती है, फिर हम दूसरों के पास मदद के लिए भागते हैं। इसलिए सबसे पहले हमें ये अपने आप से पूछना होगा कि क्या वाक़ई हम सोल्यूशन चाहते हैं ? अगर हैं तो उसे बदलने के लिए आपने क्या क़दम उठाए। अगर आप दिल से उसे बदलना नहीं चाहते या आपके मन में बदलाव की मजबूत ख्वाहिश नहीं है फिर बाक़ी तो सिर्फ बातें हैं।

अब अपनी सेहत को लेकर ही देख लीजिए, कि आपने अपने आप को फिट रखने के लिए जिम ज्वाइन करना हैं, लेकिन आप शुरू नहीं कर पा रहें है क्योंकि आप अपनी नींद के साथ कॉम्परोमाइज़ नहीं कर पा रहे। ठीक वैसे ही कंपनियों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है वो कई नए बदलाव लाना चाहती हैं लेकिन ला नहीं पाती काफी साल एक ही लकीर पर चलती रहती हैं जिस वजह से उनके प्रॉडक्ट्स की मार्केट वैल्यू कम होने लगती है, और उनकी जगह कोई और ले जाता है।

कुछ समय पहले फेसबुक ने कंप्यूटर से ज्यादा मोबाइल पर ज़ोर देना शुरू किया क्योंकि उनका 80 फीसदी फायदा मोबाइल यूजर्स के ज़रिए ही बढ़ा लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाई क्योंकि कंपनियों के बदलाव न करने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन यही वजह है कि हम पूरी तरह से सही कदम नहीं उठा पाते कोई न कोई रीज़न्स हमारे रास्ते में आ जाते हैं और सोची समझी रणनीति फेल हो जाती है।

अब जैसे आज ऑनलाइन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काफी तेज़ी आई है। नेटफ्लिक्स ने इस बाज़ार के बड़े दिग्गजों पर सेंध लगाई उनमें से एक ब्लॉकबस्टर का नाम ले सकते हैं…..ब्लॉकबस्टर ने नेटफ्लिक्स से निपटने के लिए पहले तो उसे खरीदने की सोची फिर अपनी किसी दूसरी कंपनी को उससे निपटने के लिए खड़ा किया लेकिन इतने में नेटफ्लिक्स का बाज़ार ऑनलाइन एंटरटेनमेंट की दुनियां में अपनी जड़ें फैला चुका था और ब्लॉकबस्टर की रणनीति कामयाब न हो पाई और पीछे रह गई….यहां चुनौती से निपटने का इरादा भी था, एक अच्छी रणनीति भी थी लेकिन कामयाबी से लागू नहीं कर पाए।

आपकी थोड़ी सी ढील भी आपको बर्बाद कर सकती है। चाहे आपकी निजी ज़िंदगी हो या प्रोफेशनल लाइफ या ऑफिस की उलझने… ये बातें आपके हमेशा काम आएंगी कि अगर आप किसी मुश्किल में हैं और आपके पास सोल्यूशन भी है तो उस पर मजबूत इरादे से डटे रहें जब तक कामयाब न हो जाएं।

संपादकः मनुस्मृति लखोत्रा

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