Religion & Astrology: क्या आप जानते हैं हाथ की रेखाएं सब सच बोलती हैं, खोल सकती हैं आपकी ज़िंदगी के कई राज़, जानिए कैसे ?

Religion & Astrology: क्या आप जानते हैं हाथ की रेखाएं सब सच बोलती हैं, खोल सकती हैं आपकी ज़िंदगी के कई राज़, जानिए कैसे ?

कहते हैं हाथ की रेखाएं किसी भी व्यक्ति के भविष्य का आइना होती हैं। यदि किसी भी व्यक्ति को हस्तरेखा शास्त्र पर पूरी मुहारत हासिल हो तो फिर वह अपनी ज़िंदगी से जुड़े सभी राज़ जान सकता है। हमारे शास्त्रों के अनुसार ये माना जाता है कि मनुष्य के हाथ में स्वयं ब्रह्मा जी द्वारा जन्मपत्री निर्मित की गयी है जो कभी नष्ट भी नहीं होती, जिससे भूत, वर्तमान व भविष्य से जुड़ी सारी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विद्वानों की मानें तो हस्त रेखाएं स्थिर होती है, ये कभी नहीं बदलती परंतु वैज्ञानिक खोज के आधार पर से भी निश्चित हो चुका है कि हाथ की रेखाएं परिवर्तनशील होती हैं। हस्तरेखा शास्त्र को सामुद्रिक शास्त्र के नाम से भी जाना जाता है।

इस बारे में एक कथा भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि पूर्व काल में शंकर जी के आशीर्वाद से उनके ज्येष्ठ पुत्र स्वामी कार्तिकेय ने, जनमानस की भलाई के लिए, हस्तरेखा शास्त्र की रचना की। जब यह शास्त्र पूरा होने आया, तो गणेश जी ने, आवेश में आकर, यह पुस्तक समुद्र में फेंक दी। शंकर जी ने समुद्र से आग्रह किया कि वह हस्तलिपि वापस करे। समुद्र ने उन प्रतिलिपियों को शंकर जी को वापस दिया और शंकर जी ने तबसे उसको सामुद्रिक शास्त्र के नाम से प्रचलित किया।

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार हाथों की रेखाओं से उनके भविष्य का सही अनुमान लगाया जा सकता है। ज्योतिष एवं हस्तरेखा विज्ञान के 18 प्रवर्तक हुए हैं जैसेः – सूर्य, पितामह, व्यास, वशिष्ठ, अत्रि, पराशर, कश्यप, नारद, गर्ग, मरीचि, मनु, अंगिरा, लोमश, पुलिश, च्यवन, यवन, भृगु एवं शौनक।

हस्त सामुद्रिक शास्त्र द्वारा किसी भी व्यक्ति के हाथ के गहन अध्ययन करने से उस व्यक्ति के जीवन से जुड़ी हरेक घटना के बारे में पता लगाया जा सकता है। हस्तरेखा में अंगुलियों का महत्वपूर्ण स्थान होता है।

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आइए अब जान लेते हैं हस्तरेखा के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातेः-

  • मनुष्य की हथेली को समझने के लिए हमें उसे एक मानचित्र की भांति समझना होगा जिसमें आप अपने जिस भी डेस्टिनेशन को जानना चाहते हैं उस रेखा को स्टडी करना होगा। इसी मानचित्र के द्वारा हम अपनी आयु देखते हैं। आयु को देखने के लिए हमें जीवन रेखा को देखना चाहिए। जीवन रेखा लंबी, तंग व गहरी होनी चाहिए। चौड़ी कदापि नहीं होनी चाहिए। गहरी और अच्छी जीवन रेखा हमारी प्राणशक्ति को और ताकत को बढ़ाती है। हमारी जीवन रेखा पर जीवन की अवधि, रोग और मृत्यु अंकित होती है और अन्य रेखाओं से जो पूर्वाभास प्राप्त होता है उसकी पुष्टि भी जीवन रेखा ही करती है। जीवन रेखा टूटी हो तो गर्भाशय तथा मासिक धर्म संबंधी रोग की संभावना रहती है। उन्हें शरीर टूटा-टूटा लगता है। हाथ नरम हो, और गुरु की उंगली छोटी हो, तो गर्भ नहीं ठहरता है।
  • यदि मस्तिष्क रेखा जंजीरनुमा हो तो व्यक्ति अस्थिर बुद्धि वाला अथवा पागल हो सकता है। लहरदार रेखा अशुभ मानी गई है। ऐसी रेखाएं शुभ फल प्रदान नहीं करती हैं। रेखा अगर कहीं पतली और कहीं मोटी हो तो रेखा अशुभ होती है। ऐसी रेखा वाला व्यक्ति बार-बार धोखा खाता है तथा सफलता-असफलता के बीच झूलता रहता है। मस्तिष्क और हृदय रेखाओं में द्वीप हो तथा हथेली सख्त हो तो यह स्थिति सर्वाइकल संबंधी रोग की सूचक है।मस्तिष्क रेखा को छोटी छोटी रेखाएं काटती हों तो व्यक्ति सिरदर्द से पीड़ित हो सकता है। यह रेखा पतली और उसे काटने वाली रेखाएं गहरी हों तो व्यक्ति को मस्तिष्क ज्वर होसकता है। बायें हाथ की मस्तिष्क रेखा सबल और दायें हाथ की दुर्बल हो तो व्यक्ति का दिमाग कमजोर होता है, और ऐसी स्थितिमें दिमाग से अधिक काम लेना घातक हो सकता है।
  • जीवन रेखा के अतिरिक्त यदि कोई अन्य रेखा अपने आखिरी सिरे पर पहुंच कर दो भागों में बंटी हो तो वह अत्यंत प्रभावीतथा श्रेष्ठ फल देने वाली होती है। परंतु यदि हृदय रेखा दो भागों में बंटी हो तो व्यक्ति को हृदय रोग की संभावना रहती है।
  • अगुलियां कई आकार वाली होती हैं। अंगुलियां यदि छोटी-बड़ी, मोटी-पतली, टेढ़ी-मेड़ी, गांठ वाली व बिना गांठ वाली हो सकती हैं। प्रत्येक अंगुली तीन भागों में बंटी होती हैं, जिन्हें हम पोर कहते हैं। पहली अंगुली तर्जनी, दूसरी मध्यमा, तीसरी अनामिका, चौथी को कनिष्ठा कहा जाता है। ये अंगुलियां बृहस्पति, शनि, सूर्य व बुध पर्वतों पर आधारित होती हैं। उंगलियां सीधी तथा पतली हों, हृदय रेखा सीधे बृहस्पति के नीचे जाकर खत्म हो, भाग्य रेखाएं एक से अधिक हों, सभी ग्रह उन्नत हों तो जातक करोड़पति होता है।
  • व्यवसाय एवं नौकरी के निर्धारण के लिए शनि, सूर्य, बुध एवं गुरु पर्वतों की स्थिति का विश्लेषण किया जाता है। बुध रेखा को व्यवसाय तथा उद्योग रेखा भी कहते हैं, जिन लोगों के हाथ में यह रेखा होती है वे यदि उद्योग या व्यवसाय से संबंधित नहीं होते, तो भी उनकी मित्रता व्यवसायियों उद्योगियों से अवश्य रहती है।
  • प्रशासनिक अधिकारियों का गुरु पर्वत पुष्ट एवं उभरा हुआ होता है। मंगल पर्वत पर रेखाओं का होना दौड़धूप का परिचायक होता है। जिन लोगों के मंगल पर्वत पर रेखाएं होती हैं, वे पुलिस विभाग में कार्य करते हैं या उससे संबद्ध रहते हैं।
  • पहले विवाह में यदि किसी रेखा में से कोई रेखा निकल कर नीचे की ओर जाए या नीचे की ओर झुके तो उसका फल प्रतिकूल होता है, या कमी आती है। इसके विपरीत ऐसी कोई रेखा ऊपर की ओर जाए तो फल में वृद्धि होती है।जंजीरनुमा रेखा अशुभ फल देती है।यदि विवाह रेखा, जो बुध पर्वत पर होती है, जंजीरनुमा हो तो प्रेम प्यार में असफलता का मुंह देखना पड़ता है।
  • यदि प्रणय रेखा से कोई रेखा निकल कर ऊपर की ओर जाए तो प्रेम में सफलता और सुंदर पति अथवा पत्नी की प्राप्ति होती है। परंतु यदि नीचे की ओर रुख करे तो प्रेम में असफलता मिलती तथा पति अथवा पत्नी को अस्वस्थता का सामना करना पड़ता है।शुक्र पर्वत से निकली रेखा से यदि इसका संबंध हो तो प्रेम प्रसंगों के कारण विदेश यात्रा होती है। गुरु या चंद्र पर्वत से निकली रेखाएं यदि छोटी-छोटी व ऊध्र्वगामी हों तो शोध कार्यों, या गोष्ठियों एवं अध्ययन हेतु विदेश यात्रा करनी पड़ती है।
  • हाथ में मंगल ग्रह पर बहुत अधिक रेखाएं होने से पेट से संबंधित रोग अधिक होते हैं। मंगल से निकली रेखाएं यदि जीवन और मस्तिष्क रेखाओं को पार करे जाए व शनि भी बैठा तो किसी बड़े रोग की संभावना रहती है।मंगल ग्रह पर बड़े-बड़े क्रॉस हों तो बवासीर की संभावना रहती है। इस रोग की जांच के लिए शनि ग्रह की स्थिति देखना भी आवश्यक है।किसी स्त्री के मंगल ग्रह पर मोटी-मोटी आड़ी रेखाएं हों व शनि ग्रह दबा हो तो, उसके गर्भपात या गर्भ से संबंधित रोग होने की संभावना रहती है।
  • शनि के नीचे जीवन रेखा पर द्वीप हो और उस द्वीप से निकलकर कोई रेखा ऊपर की ओर जाती हो तो व्यक्ति को खांसी हो सकती है। रेखाओं की यह स्थिति फेफड़ों की कमजोरी की भी सूचक है।

          संपादकः मनुस्मृति लखोत्रा

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