Poetry Breakfast: शर्मा बंधुओं का ये भजन आज भी तरुवर की छाया जैसा लगता है !

Poetry Breakfast: शर्मा बंधुओं का ये भजन आज भी तरुवर की छाया जैसा लगता है !

1974 में आई फिल्म परिणय का एक भजन बेहद लोकप्रिय हुआ था, खैर, उस वक्त मैं तो नहीं थी लेकिन बचपन में पिता जी अक्सर टेपरिकॉर्डर में इस भजन को बजाया करते थे। जब ये भजन घर में बजता था न तो सारा वातावरण ऐसा लगता था मानों चारों ओर एक अदभुत सी शांति ही शांति हो, हर तरफ जैसे राम का नाम ही गूंज रहा हो। तब मुझे अध्यात्म या ईश्वर के बारे ऐसी कोई अनुभूति तो नहीं थी लेकिन आज जब ये भजन सुनती हूं तो बचपन की यादें किसी फिल्म की रील तरह दिमाग में गुज़रने लग जाती हैं। एक अजीब सी शांति फिर से उस पल की याद ताज़ा करा जाती है।

आज भी जब कभी परेशान होती हूं तो इस भजन को सुनने की ललक सी मन में उठ जाती है, सोचा आज आपके साथ क्यों न शेयर कर लूं ये भजन।

शर्मा बंधूओं के और भी कई भजन उस समय हिट रहे लेकिन जितनी लोकप्रियता इस भजन ने पाई उनके किसी और भजन ने नहीं पाई।

कौन हैं ये शर्मा बंधू ?

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दरअसल, उज्जैन में रहने वाले ये चार भाई भक्ति गीत गाया करते थे। चार भाई जिनका नाम गोपाल शर्मा, सुखदेव शर्मा, कौशलेन्द्र शर्मा, राघवेन्द्र शर्मा हैं। उन दिनों इनके गाये हुए भजन इतने हिट हुए कि बहुत कम समय में इन्होंने लोगों के दिलों में अपनी एक खास जगह बना ली। जो भजन सबसे सूपरहिट रहा वो था, सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया इनके गाये अन्य भजन जैसे- तेरा मेरा, मेरा तेरा…. मेरे घनश्याम…, जिनके ह्रदय श्रीराम बसे, सुमिरन करले मेरे मन, और भगवान महादेव की स्तुति आदि अविस्मर्णीय है। ये चारो भाई जब भी कोई भजन गाते थे तो मिलकर ही गाते थे जिससे भजन इंडस्ट्री में भी एक नया ट्रेंड स्थापित हुआ। जिसके लिए इन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानिक किया गया था।

आईए फिर से याद करते हैं श्री राम नाम के रस में भीगा हुआ उनका ये भजनः-

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया,

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया,

मेरे राम ।

भटका हुआ मेरा मन था, कोई मिल ना रहा था सहारा |

लहरों से लगी हुई नाव को जैसे मिल नारहा हो किनारा |

इस लडखडाती हुई नव को जो किसी ने किनारा दिखाया,

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है,

मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||

शीतल बने आग चन्दन के जैसी राघव कृपा हो जो तेरी |

उजयाली पूनम की हो जाये राते जो थी अमावस अँधेरी |

युग युग से प्यासी मुरुभूमि ने जैसे सावन का संदेस पाया |

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है,

मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||

जिस राह की मंजिल तेरा मिलन हो उस परकदम मैं बड़ाऊ |

फूलों मे खारों मे पतझड़ बहारो मे मैं ना कबी डगमगाऊ |

पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे जी भर के अमृत पिलाया |

ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है,

मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||

भजन को सुनने के लिए नीचे दिए हुए लिंक पर click करें।

Full Original old Hindi movie Bhajan ‘Jaise Suraj ki Garmi se’ Devanagari English translations.wmv

https://www.youtube.com/watch?v=Luz758PAC04

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