Poetry Breakfast: “जज़्बात लौटा दो”

Poetry Breakfast: “जज़्बात लौटा दो”

बचपन की छोटी-छोटी यादें कैसे हमारे साथ-साथ चलती हैं न ! अकेलेपन में कभी जब पीछे मुड़कर देखते हैं तो लगता है मानों ये अभी की तो बात थी….इतने बरस बीत गए बचपन को गुज़रे हुए…न जाने कितने अपने भी साथ छोड़ गए….लेकिन जो हमारे पास रह जाती हैं बस यादें….उन्हीं प्यारी सी कुछ यादों को आपके लिए भी समेटा है…ये कविता सुनकर अपको भी कहीं न कहीं अपना बचपन और गर्मी की छुट्टीयां तो याद आ ही जाएंगी….खासकर नानी का घर..जहां सिर्फ हमारी ही मनमानी चलती है…तो फिर इस वीडियो को देखना, लाइक करना और शेयक करना न भूलें…क्योंकि अभी मुझे आपसे बहुत सी कविताएं शेयर करनी हैं….।

मनुस्मृति लखोत्रा

Image courtesy – Pixabay

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