Way to Spirituality: मौन रहना भी एक तप है जिससे उजागर होती हैं आन्तरिक शक्तियां !

Way to Spirituality: मौन रहना भी एक तप है जिससे उजागर होती हैं आन्तरिक शक्तियां !

अध्यात्म डैस्कः वक्त के साथ उलझनों या आवेशों में बहकर क्या कुछ नहीं खो देते हैं हम…अपने शरीर, मन व मस्तिष्क का ह्रास करते हैं…उलझनों, चिंताओं व शोक ने आजतक किसी को कुछ नहीं दिया बल्कि आंतरिक शक्तियों को क्षीण ही किया है…। जबकि अपनी शक्तियों को बचाने का सबसे बड़ा रहस्य ध्यान व मौन है, ध्यान व मौन व्यक्ति की इंद्रियों को संयमित रखने का कार्य करता है क्योंकि शरीर व मन का एक साथ रहना ही ध्यान केंद्रित करने का पहला पड़ाव है।

मौन की शुरुआत सबसे पहले अपनी ज़ुबान पर लगाम देने से होती है फिर धीरे-धीरे आपका मन भी मौन रहना शुरू हो जाता है। मन की चुप्पी से जब सभी संताप समाप्त हो जाएंगे फिर एक दिन ऐसा पड़ाव आएगा जब आपकी आंखे, चेहरा, आपकी भावनाएं, आपके विचार भी शांत व कोमल हो जाएंगे। तब आप इस संसार को एक नए सिरे से देखना शुरू करेंगे ठीक वैसे ही जैसे कोई नवजात शिशु संसार को देखता है लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि आप मौन रहने के दौरान सिर्फ अपने श्वास लेने की प्रक्रिया को ही महसूस करते हुए उसका आनंद लें।

अगर आप मौन रहने के फायदों के बारे में जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। मौन भी एक प्रकार का तप है। मौन से संकल्प शक्ति की वृद्धि होती है और वाणी के आवेगों पर नियंत्रण होता है। मौन से मन की शक्ति बढ़ती है। मौन एक ऐसा उपाय है जिससे आप बाहरी दुनियां के साथ-साथ आंतरिक दुनियां के साथ भी जुड़ जाते हैं। मौन के क्षणों में आन्तरिक जगत के नवीन रहस्य उद्घाटित होते हैं। मौन से सत्य की सुरक्षा व वाणी पर नियंत्रण होता है। मौन आपके स्वभाव में बदलाव लाता है आप दूसरों को उनके किए पर माफ करना शुरू कर देते हैं। मौन से दो तरह के रास्तों को पा सकते हैं आप, एक ये कि मौन से मन की मृत्यु भी हो सकती है और दूसरा मौन आपको शक्तिशाली भी बना सकता है। ये आपको देखना है कि आप मौन रहकर किस तरह के फायदों को पाना चाहेंगे।

ये माना जाता है कि शक्तिशाली मन में किसी भी प्रकार का भय, क्रोध, चिंता और व्याग्रता नहीं रहती। मौन का अभ्यास करने से सभी प्रकार के मानसिक विकार समाप्त हो जाते हैं।

वैसे योगसाधना में मौन का बड़ा ही महत्व है।  बौद्ध मठ में मौन की शक्ति जानने के लिए कई प्रयोग किए गए जिस दौरान करीब दो सौ लोगों को चुना गया इनमें विद्धार्थी, साधक, कामकाजी, व्यवसायी और नौकरीपेशा यानि सभी तरह के लोग शामिल किए गए और उनसे कहा गया कि आपने कोई भी काम करते समय चुप रहना है, इन चुने गए लोगों को 21 दिन ऐसा ही करने के लिए कहा गया और 21 दिन बाद जब भागीदारों ने नोटबुक में जवाब लिखे और निरीक्षकों ने साधकों की टिप्पणियों को मिला कर देखा तो ये पाया कि मौन दोनों तरह के काम यानि कामकाजी व लौकिक कामों में लगे लोगों के लिए फायदेमंद है इससे उनमें सकारात्मक सोच का विकास हुआ और उनमें से कई लोगों ने अपने भीतर आंतरिक और मानसिक शक्ति को मजबूत पाया। लामा ने भी लिखा है कि काम करते हुए अपने सांसों के आने-जाने पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए और जो भी दिखाई या सुनाई दे रहा है उसे बिना किसी प्रतिक्रिया के देखते रहें”।

Leave a Reply

Close Menu
error: Content is protected !!