Happiness is Free:  भीतर ये कैसा शोर है ? आज मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस है पर समय नहीं है !

Happiness is Free: भीतर ये कैसा शोर है ? आज मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस है पर समय नहीं है !

आज जब भी कभी फोन पर पुराने दोस्तों से बात होती है या तो वो फोन उठाते नहीं हैं अगर उठा भी लें तो थोड़ा व्यस्त हूं कहकर फोन काट देते हैं और शाम को ऑफिस से फ्री होकर थके-हारे ट्रैफिक जाम में फंसे हुए या बस का इंतज़ार करते समय वापिस फोन कर लिया करते हैं, खैर, अब मुझे भी समझ आ गया है कि उनसे बात करने का सही समय क्या है…।

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फोन पर बात करते ही उनकी पहली शिकायत यही रहती है कि “क्या करूं ऑफिस में बहुत टेंशन चल रही है…टाइम ही नहीं मिल पाता…..कोई मेरे लायक किसी अच्छी कंपनी में जॉब हो तो बताना”…दरअसल, आज के समय में हमारे समाज में एक ऐसा तबका खड़ा हो गया है जो अपनी नौकरी के चलते तनाव में है….आज महज 10-15 साल नौकरी करते हुए अच्छे-खासे तज़ुर्बे वाले युवा लड़के-लड़कियां 35 साल की उम्र तक आते-आते अपनी नौकरी और काम से नाखुश हैं….ज्यादातर तनाव के शिकार हैं….तो दूसरी तरफ बेरोज़गारों की संख्या भी कुछ कम नहीं हुई है….आज जिनके पास नौकरी है उन्हें उनके लायक काम नहीं मिल पाता…. जिस वजह से उनका इन्क्रीमेंट और प्रोमोशन पर असर पड़ता है और ज्यादातर इम्पलॉइज़ लंबे समय तक एक अनुबंध में काम करते हुए साप्ताहिक छुट्टी के अलावा अतिरिक्त अवकाश ले नहीं पाते और न ही उन्हें मैडिकल, इनशोरेंस और अन्य सुविधाएं मिल पाती हैं। रूटीन क्या है सुबह जल्दी उठकर ऑफिस जाना और देर रात लौटना।

आज प्राइवेट सेक्टर में इम्लॉइज़ को अपने टारगेट अचीव करने के लिए सप्ताह में करीब 65 से 75 घंटे तक काम करना पड़ रहा है जहां पर ऑफिस में ज्यादा देर तक काम करने वालों से बॉस बेहद खुश होते हैं….लेकिन इन्क्रीमेंट के समय फिर भी टालमटोल…जिस वजह से ज़िंदगी में सिर्फ भागम-भाग ही रह गया है….अब सवाल ये उठता है कि इन सब की खुशी कहां चली गई ?….सब कुछ होते हुए भी आज हर कोई परेशान क्यों है ?….हां हो सकता है आज आपके पास अच्छा घर है….गाड़ी है….बैंक बैलेंस हैं….लेकिन जो नहीं है वो अपने बच्चों के लिए तो क्या…, आपके पास अपने आप के लिए भी टाइम नहीं है….!

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कई बार तो यूं लगता है कि धीरे-धीरे कहीं किसी मकड़जाल में तो नहीं फंसते जा रहे !  जहां पर व्यक्तिगत आज़ादी खत्म होती जा रही है, परिवार से अलगाव बढ़ता जा रहा है….बीवी और बच्चों को वक्त नहीं दे पा रहे हैं….पेरेंट्स का चैकअप नहीं करवा पाते हैं….अपनी हेल्थ का ख्याल नहीं रख पा रहे हैं…याद कीजिए कितने दिन हो गए आपको घर पर खुशी-खुशी गए हुए….सबके साथ मिलकर पार्टी करते हुए…..कहीं आउटिंग पर गए हुए….एक सवाल आज आप अपने आप से ज़रूर कीजिएगा…कि क्या आप अपने समय को सही ढंग से जी पा रहे हैं ?

मशीन मत बनिए…इंसान हैं इंसान की तरह अपनी ज़िंदगी को जीएं…..उसमें थोड़ा रोमांच लाएं….थोड़ी खुशियां लाएं….वक्त को अपने तरीके से चलाएं, न कि वक्त के तरीके से चलें….ऑफिस के काम को ऑफिस तक ही सीमित रखें। उसका प्रभाव अपने परिवार और व्यक्तिगत जीवन पर न पड़ने दें……अगर आप अपनी नौकरी से खुश हैं तो अच्छा है, डटे रहें…., यदि नहीं तो कुछ नयां करने की सोचने, अपने काम में बदलाव लाएं…नई नौकरी, नईं जगह और बढ़ा हुआ वेतन आपकी ज़िंदगी में बड़े बदलाव ला सकता है….जिस काम में आपको खुशी मिलती है वही करें….अच्छी डाइट लें, योगा करें, सैर पर जाएं…ऑफिस टाइम खत्म होते ही अपने घर जाएं…।

याद कीजिए वो दिन जब आप एक अच्छी नौकरी की तलाश में थे और तब कितने ही सपने बुना करते थे कि जब नौकरी मिलेगी तो आप अपने परिवार के लिए वो सारी खुशियां जुटाएंगे जो आप कभी नहीं जुटा पाए…पिताजी के कुछ अधूरे सपने, बहन की शादी, मां की कुछ हसरतें, बीवी के साथ आऊटिंग, बच्चों के साथ खेलना..वगैरह वगैरह…।

आज कई ऐसे सर्वे हो चुके हैं जिनमें ये पाया गया है ऑफिस में ज्यादा देर तक बैठना कितना खतरनाक है।

अब ये भी जान लें….।

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक शारीरिक निष्क्रियता से दुनियाभर में होने वाली मौत का चौथा सबसे बड़ा कारण है।

बैठकर काम करने से 1 कैलोरी प्रति मिनट की गिरावट रुक जाती है।

इससे मोटापा और मेटाबोलिक सिंट्रोम बढ़ता है।

मोटापा घटने के चांस 90 फीसदी कम हो जाते हैं।

डायबिटीज़ होने का खतरा 30 फीसदी बढ़ जाता है।

दिल की बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

ब्रेस्ट और कोलोन कैंसर की संभावना 25 फीसदी बढ़ जाती है।

अब ये भी जान ले कि आपको किन तरीकों को अपनाकर अपनी सुरक्षा करनी है।

सप्ताह में रोज़ाना कम से कम 5 से 30 मिनट व्यायाम ज़रूर करें।

अगर आप ज्यादा देर कुर्सी पर बैठते हैं तो एक या आधे घंटे के अन्तराल के बाद खड़े हों।

सीट से खड़े होकर स्ट्रैचिंग करें।

हो सके तो स्टैंडिग डैस्क का इस्तेमाल करें।

चलते हुए मीटिंग करें।

10 मिनट के लिए हाथ-पैरों को चलाएं।

आज दुनियां में कई ऐसी कंपनियां हैं जहां स्टेंडिंग डेस्क की व्यवस्था की गई है जैसे गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट और ट्विटर आदि मार्क जुकरबर्ग तो खुद खड़े रहकर काम करना ज्यादा पसंद करते हैं।

हमारा फर्ज़ था आपका ध्यान आपकी सेहत की ओर ले जाना क्योंकि हमें आपकी फिक्र है अब आप अपनी रूटीन में कुछ बदलाव लाएं…और अपने सुझाव वेबसाइट पर और इस लेख के नीचे दिए हुए कमेंट बॉक्स पर देना न भूलें….

धन्यवाद

संपादकः मनुस्मृति लखोत्रा

Image courtesy: Pixabay

 

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